कोरोना की मार पे सब लाचार : भुलक्कड़ बनारसी

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कोरोना की मार पे सब लाचार : भुलक्कड़ बनारसी

(1)

करोना आफत ले कर आई।
सब लोग दे रहे है दुहाई।
घर में ही लोग सड़ रहे।
एक दूजे से अकड़ रहे हैं।
समझ न कोई युक्ति आवे।
बाहर निकले तब कुछ पावे।
बाहर पुलिस दौड़ाती भाई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(2)
रोगी बेचारे परेशान दिखते।
टहल न पाते हैरान दिखते।
सुगर उनका बढ़ता जा रहा।
घुमटा चक्कर खूब आ रहा।
ऐसी मुसिबत सामने आई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(3)
कोई रास्ते में है अटका।
उसको लगा जोर का झटका।
खाने का सामना नहीं है।
रहने को स्थान नहीं है।
ये कैसी आफत है भाई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(4)
घर में दाई नहीं आ रही।
पत्नी को नहीं भा रही।
कर क्या सकते है भाई।
हाथ बटाना हमें है भाई।
गम चारों तरफ है छाई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(5)
बेटा अकेले बाहर में है।
चिंता गार्जियन में है।
कैसे होगा पता नहीं है।
खाया होगा पता नहीं है।
ये कैसी उलझन है आई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(6)
पुलिस सबको दौड़ा रही है।
भीड़ जुटे न भगा रही है।
डाज देके जो भागना चाहे।
पकड़ाने पर ड़ंडा पावे।
सबके चेहरे पर मातम छाई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(7)
करोना है खतरनाक बीमारी।
हल्के में लेना पड़ेगा भारी।
सोसल डीस्टेंन्सी आप बनाओ।
अपने मन की मत चलाओ।
हमने मानने की कसम है खाई।
करोना की दे रहे दुहाई।
(8)
जीद्द फानना ठीक नहीं है।
सेहत के लिए नीक नहीं है।
बाज आओ हरकत से सांई।
वर्ना सुख चैन छिन जाई।
चाइना हव पुरा कस्साई।
करोना की दे रहे दुहाई।

भुक्कलड़ बनारसी

( हास्य – व्यंग)

वाराणसी , उत्तर प्रदेश

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