जीवन के हर पृष्ठ पर : अरुण कुमार आर्य

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जीवन के हर पृष्ठ पर
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तुम्हारे जीवन के हर पृष्ठ पर ऐ माँ
ममता की लिखी गजब कहानी है
संतान के निर्माण में तेरी दर्द भरी
रग रग पर लिखी अमिट निशानी है

पिता के कर्म नित्य ढोकर गम्भीरता
बच्चों के विकास में रहते हैं चिंतित
कौन लेखनी लिखेगी उनकी तड़प
विश्व-बगिया है उनसे अभिसिंचित।

कौन गा रहा संयोग विरह के गीत
किसके करों में वेदना हरण दिखती
जीवन नौका खेने वाली प्रिय पत्नी
कर्मों से परिवार का भाग्य लिखती।

एक पृष्ठ ऐसा भी है दूर देश में बसा
जो करता है शुभ दिवस की कामना
हाथ में रोली,राखी ले आती है बहन
भाई के शुभ की करती हुई अर्चना।

कुछ पन्ने जुड़ने वाले हैं भविष्य में
मेरी बिटिया की होगी बात जुबानी
मम्मी-पापा को ना हो कष्ट भइया
पूछेगी उनसे उनकी करुण कहानी

क्यों धुँधले पन्ने पर कुछ लिखने होंगे
बेटे-बहु की कुछ एक भी कहानियाँ
संस्कारों मेें मैंने ऐसा ढाला है उनको
नहीं करेंगे कुछ भी हमसे नादानियाँ

जीवन हमारा है बहुत लम्बा-चौड़ा
इसकी पुस्तिका में अगणित पृष्ठ हैं
संत,महात्मा,आचार्य,अतिथियों की
लिखी गयी गाथा अत्यंत वलिष्ठ हैं।

एक अधूरे पन्ने पर लिखेगा इबारत
होंगे उस पर निश्छल प्यार के वाक्य
आर्य” है वह एक दिल दो जिस्म का
मित्रता के लिए कौन देता है साक्ष्य।

अरुण कुमार आर्य
प्रधान
आर्य समाज मन्दिर
पं०दीन दयाल उपाध्याय नगर
चन्दौली

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