तुझपे मुझे अभिमान है (कविता) : दीपक शर्मा

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कविता – तुझपे मुझे अभिमान है

जिसने सींचा खून से अपने,
भूमि भारत माता की।
भला हम कैसे भूलेंगे,
कुर्बानी उस विधाता की।

उन्हें दोबारा लाने का,
मन में मेरे अरमान है।
धन्य हों देश के वीरों,
तुझपे मुझे अभिमान है।।

इस में झलक रही है,
आज उनकी निशानी।
लिए प्राण हथेली पर,
दे दी जिसने,
जान की कुर्बानी।

उस मिट्टी में खुशबू है,
जिसमें करोड़ों बलिदान हैं।
धन्य हैं देश के वीरों,
तुझपे मुझे अभिमान है।

झूल पड़े जो फाँसी पर,
समझ के झूला सावन का।
खायें लाठी और गोलियाँ,
रखे लाज हिंद देश पावन का।।

झूका दी जिसने गोरों की गर्दन,
वे वीर महान हैं।
धन्य हों देश के वीरों,
तुझपे मुझे अभिमान है।

-दीपक शर्मा
जौनपुर उत्तर प्रदेश

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